Sunday, September 6, 2009

Ummeed

लम्हा दर लम्हा,
साया दर साया,
एक उम्मीद।

ये पल क्या है?
आदि है, अंत है, क्या है?
है आदि से अंत तक
फैला कोई दरिया?

आदि?
है?
या एक उम्मीद है शुरुआत की?
हाँ,
उम्मीद से अंत तक,
शायद यही होगा हर पल,
उम्मीद से अंत तक फैला हुआ,
एक दरिया।

अंत?
है?
या वो भी कोई मंडराती,
गुमराह, बंजारी,
उम्मीद?


Wednesday, July 1, 2009

A Translation of an old, small poem...

देख लूँ एक पल, बस एक क्षण ,
आँख भर कर मैं तुम्हे,
और फिर बैठूं,
करूँ फिर से
तुम्हारा इंतज़ार।

Translation..

" Let me look at you now,
just for a moment,
so that I am content,
to sit, and wait,
yet again,
for you. "