लम्हा दर लम्हा,
साया दर साया,
एक उम्मीद।
ये पल क्या है?
आदि है, अंत है, क्या है?
है आदि से अंत तक
फैला कोई दरिया?
आदि?
है?
या एक उम्मीद है शुरुआत की?
हाँ,
उम्मीद से अंत तक,
शायद यही होगा हर पल,
उम्मीद से अंत तक फैला हुआ,
एक दरिया।
अंत?
है?
या वो भी कोई मंडराती,
गुमराह, बंजारी,
उम्मीद?
Sunday, September 6, 2009
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